जयपुर: आखिरकार संगठन सृजन के तहत बनाए गए कांग्रेस के जिलों के कप्तानों को लंबे इंतजार के बाद अब नई टीम मिलने लगी है. जिला अध्यक्षों की नियुक्ति के करीब 6 माह बाद अब जिला कांग्रेस कमेटियों का गठन शुरु हुआ. अभी 50 में से 4 जिलों की कार्यकारिणी का गठन हो चुका है. करीब 2 हजार से ज्यादा पदाधिकारी जिलों की कार्यकारिणी में एडजस्ट किए जाएंगे.
संगठन सृजन अभियान के तहत तमाम 50 जिला अध्यक्षों की नियुक्ति तो हाईकमान ने करीब 6 माह पहले कर दी थी. लेकिन उनकी नई टीम के गठन का तभी से बेसब्री से इंतजार चल रहा था. लेकिन अब जाकर जिला कांग्रेस कार्यकारिणी के गठन का दौर शुरु हुआ है. पिछले दिनों प्रदेश नेतृत्व ने चार जिलों की कार्यकारिणी का ऐलान किया. लेकिन अभी भी 46 जिलों में नई टीम का गठन करना शेष है. नेतृत्व का दावा है कि इसी माह बाकी बची तमाम जिलों की कार्यकारिणी घोषित कर दी जाएगी. दरअसल इस बार हाईकमान के 51 और 31 पदाधिकारियों की कार्यकारिणी बनाने के निर्देशों के चलते गठन में देरी हुई. वहीं गुटबाजी,सोशल इंजीनियरिंग और सियासी समीकरण साधने के चलते भी वक्त लगा.
कांग्रेस के जिलों के कप्तानों को मिलने लगी अब नई टीम
-चार जिला कांग्रेस कमेटियों का हुआ अब तक गठन
-जोधपुर शहर,बारां,डूंगरपुर और सलूंबर जिलों की बनी कमेटियां
-जिला अध्यक्षों की नियुक्ति के करीब 6 माह बाद हुआ गठन शुरु
-इस बार हाईकमान की नई गाइडलाइन से बन रही है कमेटियां
-39 जिलों में 51-51 पदाधिकारियों की बनेगी कार्यकारिणी
-11 जिलों में 31-31 जिला पदाधिकारी बनाए जाएंगे कमेटी में
-टोटल 50 जिलों में बनेंगे 2 हजार 330 जिला पदाधिकारी
-4 या उससे ज्यादा विधानसभा सीट वाले जिले में होंगे 51 पदाधिकारी
-3 या उससे कम विधानसभा क्षेत्र के जिलों में बनेंगे 31 पदाधिकारी
-नीमकाथाना,प्रतापगढ़,कोटा शहर,जैसलमेर,फलोदी,सलूंबर,जोधपुर शहर
-डीग-कुम्हेर,खैरथल-तिजारा,अजमेर शहर औऱ भीलवाड़ा शहर में बनेंगे पदाधिकारी
प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व का दावा है कि शेष 46 जिलों की कार्यकारिणी का जल्द ऐलान कर दिया जाएगा. दरअसल 51 और 31 पदाधिकारियों की कमेटी गठन के राइडर को फॉलो करने में जिला अध्यक्ष के पसीने छूट गए. क्योंकि इसके तहत किस नेता को पदाधिकारी बनाए और किसको नहीं बनाए का संकट पैदा हो गया. वहीं सोशल इंजीनियरिंग और सियासी समीकरण साधने में भी दिक्कत आई. ऐसे में गुटबाजी और खींचतान बढ़ने जैसी स्थिति बन गई थी. लिहाजा तमाम वरिष्ठ नेताओं से चर्चा करके सहमति बनाने का प्रयास किया गया. इन तमाम कारणों के चलते कार्यकारिणी गठन में छह माह का लंबा समय लग गया.
नई टीम का गठन शुरु होने से अब कप्तान सियासी पारी बेहतर तरीके से खेल पाएंगे. क्योंकि अभी तक तो अकेले ही पुरानी टीम के भरोसे गाड़ी चला रहे थे. लेकिन अब नए पदाधिकारियों का सहयोग मिलेगा और जिलों में संगठन गतिविधियों को नई धार भी मिलेगी. इन पदाधिकारियों को समय समय पर सक्रियता और कार्यशैली की भी सतत निगरानी होगी. साथ ही ट्रेनिंग के जरिए भी उन्हें हर विषयों पर ट्रेंड किया जाएगा.