जयपुरः राजधानी के महिला अस्पताल में भर्ती एक महिला को मां बनने के "सुख" से पहले बड़े इम्तिहान से गुजरना पड़ा. अस्पताल के चिकित्सकों ने महिला के गर्भ में पल रही चार किलकारियों में से दो बच्चों की दिल की धड़कन इसलिए बन्द की, ताकि दो शेष बच्चे परिवार में खुशियां बिखेर सके. जी हां प्रदेश के किसी भी सरकारी अस्पताल में ये सबकुछ संभव हुआ है पहली बार किए गए फिटल रिडक्शन प्रोसिजर से.
"मां" एक शब्द नहीं पूरी दुनिया है. मां का त्याग, बलिदान, ममत्व और समर्पण संतान के लिए सबसे विराट होता है. ईश्वर ने स्त्री को मां बनने का वरदान दिया, लेकिन इस खुशी के लिए कठोर तप से गुजरना पड़ता है. जी हां, अलवर निवासी महिला के लिए ये तप कुछ ज्यादा की कठोर साबित हुआ. दो बार गर्भपात का दंश झेल चुकी महिला जब तीसरी बार गर्भवती हुई तो परिवार में खुशी का ठिकाना नहीं था. इस बार भगवान ने महिला के गर्भ में एक नहीं चार जिन्दगियां दी. लेकिन नीयती को कुछ और ही मंजूर था. महिला चिकित्सालय में जांच कराने आई गर्भवती महिला को चिकित्सकों ने देखा तो पाया कि पेट में पल रही किलकारियां "खतरे" में है. क्योंकि बहु-गर्भावस्था में भ्रूणों के जीवित रहने की संभावना काफी कम होती है. ऐसे में चिकित्सकों की टीम ने परिजनों की काउंसलिंग की और उसके बाद किया गया राजस्थान के किसी भी सरकारी अस्पताल का पहला फिटल रिडक्शन प्रोसिजर.
एक नजर में फिटल रिडक्शन प्रोसिजर
- फिटल रिडक्शन एक मेडिकल प्रक्रिया है जिसमें बहु-गर्भावस्था की स्थिति में भ्रूणों की संख्या को कम किया जाता है. आमतौर पर दो भ्रूण की सांसें थामी जाती है ताकि शेष भ्रूणों के लिए जोखिम कम किया जा सके.
- यह प्रक्रिया गर्भावस्था की पहली या दूसरी तिमाही में की जाती है और इसमें एक पतली सुई का उपयोग करके भ्रूणों के हृदय में पोटेशियम क्लोराइड इंजेक्ट की जाती है.
- इस प्रक्रिया में मृत भ्रूण को शरीर द्वारा अवशोषित कर लिया जाता है या कुछ समय बाद प्रसव के दौरान शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है.
- अभी तक ये प्रोसिजर निजी अस्पतालों में ही किया जाता था, जिसके लिए जरूरतमंद परिवारों को काफी खर्च करना पड़ता था.
- लेकिन महिला अस्पताल में पिछले दिनों फीटल मेडिसिन डिविजन शुरू किया गया, जिसके चलते प्रदेश का पहला केस सरकारी तंत्र में हो पाया