जैसलमेर: थार का रेगिस्तान… जहां गर्मियों में पानी की एक-एक बूंद सोने से भी ज्यादा कीमती मानी जाती है.जहां हर साल नहरबंदी के दौरान हजारों गांवों में पानी का संकट गहराता रहा. वहीं अब जैसलमेर के रेगिस्तान में तैयार हुई है एक ऐसी विशाल कृत्रिम झील, जिसे इलाके की जल क्रांति माना जा रहा है.242 करोड़ रुपए की लागत से बनी यह झील ना सिर्फ जैसलमेर और बाड़मेर की करीब 50 लाख आबादी की प्यास बुझाएगी, बल्कि आने वाले वर्षों में रेगिस्तान की तस्वीर भी बदल सकती है.खास बात ये है कि रेतीली जमीन पानी न सोख ले, इसके लिए झील के नीचे लाखों स्क्वायर मीटर में खास HDPE प्लास्टिक शीट बिछाई गई है. कैसी है ये मेगा झील. कैसे करेगी काम और क्यों इसे थार का ‘वाटर बैंक’ कहा जा रहा है.
रेत… तपती हवाएं… और पानी के लिए संघर्ष…राजस्थान के पश्चिमी सरहदी जिले जैसलमेर और बाड़मेर की पहचान लंबे समय तक इसी तस्वीर से जुड़ी रही. गर्मियों में हालात ऐसे बनते थे कि पानी की सप्लाई रोकने वाली एक महीने की नहरबंदी लोगों की जिंदगी मुश्किल कर देती थी. लेकिन अब रेगिस्तान के बीचों-बीच तैयार हुई ये विशाल कृत्रिम झील उम्मीद की नई तस्वीर बनकर सामने आई है. करीब 242 करोड़ रुपए की लागत से बनी ये झील 28 किलोमीटर लंबी और करीब 33 फीट गहरी है. इसका आकार इतना विशाल है कि एक छोर से दूसरे छोर तक पहुंचने में घंटों का समय लग सकता है.दावा किया जा रहा है कि इसमें इतना पानी स्टोर किया जा सकेगा जिससे जैसलमेर और बाड़मेर की करीब 50 लाख आबादी को सालभर तक पानी सप्लाई की जा सके.
दरअसल हर साल इंदिरा गांधी नहर की मरम्मत और रखरखाव के लिए नहरबंदी की जाती है. इस दौरान सीमावर्ती इलाकों में पानी का संकट गहरा जाता था. ऐसे में लंबे समय से ऐसी बड़ी जल भंडारण परियोजना की जरूरत महसूस की जा रही थी, जहां अतिरिक्त पानी को स्टोर कर जरूरत के समय उपयोग में लिया जा सके. साल 2024 में इस परियोजना पर काम शुरू हुआ और अब यह विशाल झील तैयार हो चुकी है.इसे इंदिरा गांधी नहर से जोड़ा गया है ताकि मानसून के दौरान आने वाले अतिरिक्त पानी को इसमें स्टोर किया जा सके. जैसलमेर के रेगिस्तान में आर्टिफिशियल झील तैयार की गई है.
जलदाय विभाग (PHED) का दावा है कि इस जिगजैग झील से जैसलमेर और बाड़मेर जिलों में 365 दिन पानी सप्लाई की जा सकेगी. 28 किमी लंबी यह झील 33 फीट गहरी है. दावा है कि इस झील को पार (एक से दूसरे छोर) करने में करीब 24 घंटे का समय लगेगा.रेगिस्तानी मिट्टी इसमें भरा पानी न सोख ले, इसके लिए इसमें नीचे 300 माइक्रोन की स्पेशल प्लास्टिक शीट बिछाई गई है. जो पानी को जमीन में जाने से रोकती है. इसमें इंदिरा गांधी नहर से आया बारिश का पानी स्टोर किया जाएगा. इसके बाद फिल्टर प्लांट से बाड़मेर-जैसलमेर के घरों में पहुंचाया जाएगा. इससे 50 लाख की आबादी को एक साल तक लगातार पानी दिया जा सकेगा.
वीओ : इस झील की सबसे बड़ी खासियत इसकी इंजीनियरिंग है. रेगिस्तान की मिट्टी पानी को बहुत तेजी से सोख लेती है. ऐसे में अगर सीधे पानी भरा जाता तो करोड़ों लीटर पानी जमीन में रिस जाता. इसी चुनौती से निपटने के लिए पूरी झील के बेस में 300 माइक्रोन की स्पेशल HDPE प्लास्टिक शीट बिछाई गई है. करीब 76 लाख स्क्वायर मीटर क्षेत्र में फैली इस शीट के ऊपर ढाई फीट मोटी मिट्टी की परत डाली गई है, ताकि प्लास्टिक लंबे समय तक सुरक्षित रहे.अधिकारियों का दावा है कि यह लेयर करीब 100 साल तक खराब नहीं होगी.
मानसून के दौरान पंजाब और हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश होने पर इंदिरा गांधी नहर में क्षमता से ज्यादा पानी आता है.अब तक यह अतिरिक्त पानी आगे बहा दिया जाता था, लेकिन अब इसे मोड़कर इस झील में स्टोर किया जाएगा.इसके लिए करीब एक किलोमीटर लंबा एस्केप चैनल तैयार किया गया है. दो बड़े गेट लगाए गए हैं — एक नहर से पानी लेने के लिए और दूसरा झील में पानी छोड़ने के लिए.यानि अब बारिश का अतिरिक्त पानी बर्बाद नहीं होगा, बल्कि भविष्य के लिए बचाया जाएगा.जब झील पूरी तरह भर जाएगी, तब यहां से विशाल पाइपलाइन सिस्टम के जरिए पानी मोहनगढ़ फिल्टर प्लांट तक पहुंचाया जाएगा.फिल्टर प्लांट में पानी को साफ और शुद्ध करने के बाद इसे पाइपलाइन नेटवर्क के जरिए जैसलमेर और बाड़मेर के शहरों और गांवों तक सप्लाई किया जाएगा.अधिकारियों का दावा है कि यह व्यवस्था नहरबंदी के दौरान भी लगातार पेयजल सप्लाई बनाए रखने में मदद करेगी.
वीओ : इस परियोजना को तैयार करने में करीब 400 मजदूरों और 10 इंजीनियरों की टीम ने लगातार काम किया. सचिन कंस्ट्रक्शन कंपनी और गुडविल एडवांस कंस्ट्रक्शन कंपनी ने मिलकर इस मेगा प्रोजेक्ट को तैयार किया है. रेगिस्तान के बीच इतनी बड़ी कृत्रिम झील बनाना तकनीकी रूप से भी बेहद चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है. विशेषज्ञ इसे पश्चिमी राजस्थान की सबसे बड़ी जल भंडारण परियोजनाओं में से एक मान रहे हैं.
थार के लोगों के लिए पानी सिर्फ जरूरत नहीं, बल्कि जिंदगी का सबसे बड़ा संघर्ष रहा है. कई गांवों में आज भी लोग दूर-दूर से पानी लाते हैं. ऐसे में यह झील सिर्फ एक प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि आने वाले समय की जल सुरक्षा का बड़ा आधार बन सकती है.अगर यह योजना अपने पूरे उद्देश्य में सफल रहती है, तो आने वाले वर्षों में जैसलमेर और बाड़मेर के लाखों लोगों को पानी संकट से बड़ी राहत मिल सकती है. रेत के समंदर में बना ये ‘जल समंदर’ अब थार की नई उम्मीद बन चुका है. 242 करोड़ की लागत से तैयार इस मेगा प्रोजेक्ट से ना सिर्फ लाखों लोगों की प्यास बुझाने का दावा किया जा रहा है, बल्कि रेगिस्तान में जल संरक्षण की नई मिसाल भी पेश की गई है.
...जैसलमेर से सूर्यवीर सिंह तंवर की रिपोर्ट