VIDEO: PM मोदी की देशवासियों से इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने की अपील, लेकिन राजस्थान में सब्सिडी नहीं मिलने से घटा रुझान, देखिए ये खास रिपोर्ट

जयपुर: तेल संकट और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की अपील कर रहे हैं. देश को पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता कम करने और ग्रीन मोबिलिटी की ओर बढ़ाने की बात कही जा रही है. लेकिन राजस्थान में हालात इसके बिल्कुल उलट नजर आ रहे हैं. यहां सरकार की महत्वाकांक्षी राजस्थान इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी फाइलों में उलझकर रह गई है हजारों ई-वाहन खरीदार आज भी सब्सिडी का इंतजार कर रहे हैं. 
राजस्थान में पूर्ववर्ती सरकार ने सितंबर 2022 में राजस्थान इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी (REVP-2022) लागू की थी. इसका मकसद था राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना, प्रदूषण कम करना और पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता घटाना. पॉलिसी को पांच साल के लिए लागू किया गया था, यानी यह 2027 तक प्रभावी रहनी है. 

नीति के तहत इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों पर बैटरी क्षमता के आधार पर 5 हजार से 10 हजार रुपये तक की सब्सिडी देने का प्रावधान किया गया. वहीं ई-रिक्शा और अन्य इलेक्ट्रिक वाहनों पर 10 हजार से 20 हजार रुपए तक की सहायता राशि तय की गई. इसके अलावा खरीदारों को एसजीएसटी रीइम्बर्समेंट का लाभ देने की भी घोषणा की गई थी. सरकार ने इसके लिए करीब 40 करोड़ रुपए का बजट भी मंजूर किया था, लेकिन हकीकत यह है कि 2022 से लेकर अब 2026 तक हजारों उपभोक्ताओं को सब्सिडी नहीं मिल पाई है.

परिवहन विभाग के दावे लगातार होते रहे, लेकिन ज़मीन पर भुगतान शुरू नहीं हो सका. नतीजा यह हुआ कि ई-वाहन खरीदने वाले उपभोक्ता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं. ई-वाहन मालिकों का कहना है कि उन्होंने सरकार की घोषणा और सब्सिडी के भरोसे इलेक्ट्रिक वाहन खरीदे थे. कई लोगों ने पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखकर ई-स्कूटर और ई-रिक्शा लिए, लेकिन 4 साल बाद भी उन्हें 5 हजार से 20 हजार रुपए तक की सब्सिडी नहीं मिली. डीलरों का कहना है कि इस देरी का सीधा असर बाजार पर पड़ा है. जो ग्राहक पहले सब्सिडी के चलते ई-वाहन खरीद चुके थे, वही अब दूसरों को खरीदारी से रोक रहे हैं. इससे इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री प्रभावित हुई है और राज्य का ग्रीन मोबिलिटी मिशन कमजोर पड़ रहा है.

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब नीति लागू है, बजट स्वीकृत है और आवेदन भी जमा हो चुके हैं, तो आखिर सब्सिडी का भुगतान क्यों अटका हुआ है, परिवहन विभाग के अधिकारियों से जब इस बारे में बात की गई तो उन्होंने तकनीकी खामी बता कर यह जवाब दिया कि अभी भी सब्सिडी देने में समय लगेगा ,ऐसे समय में जब प्रधानमंत्री लगातार इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने और फ्यूल बचाने की बात कर रहे हैं, राजस्थान में परिवहन विभाग की सुस्ती सरकार की मंशा पर सवाल खड़े कर रही है. अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या प्रधानमंत्री की अपील के बाद राजस्थान का परिवहन विभाग जागेगा और वर्षों से अटकी ई-व्हीकल सब्सिडी जारी करेगा, या फिर राजस्थान इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी भी सिर्फ घोषणाओं तक सीमित रह जाएगी.