6 हजार करोड़ कमाई वाली योजना 16 साल में भी अधूरी, JDA की नींदड़ योजना नहीं निकल पा रही कागजों से बाहर, देखिए खास रिपोर्ट

6 हजार करोड़ कमाई वाली योजना 16 साल में भी अधूरी, JDA की नींदड़ योजना नहीं निकल पा रही कागजों से बाहर, देखिए खास रिपोर्ट

जयपुरः जेडीए के खजाने में करीब 6 हजार करोड़ रुपए लाने वाली योजना पिछले 16 सालों से कागजों से बाहर नहीं निकल पा रही है. इस योजना से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर पिछले आठ महीने जेडीए को राज्य सरकार से मार्गदर्शन का है इंतजार--जेडीए की आखिर कौनसी है यह योजना और किन कारणों के चलते यह योजना 16 सालों में भी पूरी नहीं हो पाई है, 

राजधानी के सीकर रोड पर ग्राम नींदड़ मे जेडीए ने 16 साल पहले यहां बड़ी आवासीय योजना प्रस्तावित की थी. योजना को लेकर कई किसानों से जेडीए ने भूमि समर्पित कराई, लेकिन इनमें से कई किसानों को जेडीए ने मुआवजे के विकसित भूखंड नहीं दिए. किसानों का एक धड़ा जेडीए की अवाप्ति विरोध कर रहा है. योजना की भूमि पर कॉलोनियां भी बसी हुई हैं. नींदड बचाओ किसान संघर्ष समिति ने 17 जून 2025 को विभिन्न मांगों को लेकर जेडीए आयुक्त को ज्ञापन दिया था. ज्ञापन में रखी गई मांगों पर जेडीए ने अपना पक्ष रखते हुए पूरा मामला मार्गदर्शन के लिए नगरीय विकास विभाग को 17 जुलाई 2025 को भेज दिया था. आपको सबसे पहले योजना की जानकारी देते हैं-

-यह नींदड़ आवासीय योजना 327 हैक्टेयर में प्रस्तावित है
-करीब 286 हेक्टेयर भूमि अवाप्ति के लिए पहली अधिसूचना 4 जनवरी 2010 को जारी की गयी थी
-शेष 41.45 हैक्टेयर भूमि जविप्रा की स्वंय की भूमि है
-भूमि अवाप्ति का अवार्ड दिनांक 31 मई  2013 को जारी किया गया
-41.27 हैक्टेयर भूमि का नकद मुआवजा सिविल कोर्ट में जमा कराया जा चुका है
-अवाप्ति के खिलाफ काश्तकारों की ओर से दायर याचिकाओं को हाईकोर्ट खारिज कर चुका है
-सुप्रीम कोर्ट ने भी 4 सितम्बर 2018 के अपने आदेश में अवाप्ति की प्रक्रिया को सही माना है
-करीब 600 खातेदार जेडीए के पक्ष में अपनी 122 हैक्टेयर भूमि समर्पित कर चुके हैं
-जमीन देने वाले करीब 450 खातेदारों को जेडीए आरक्षण पत्र जारी कर चुका है
-इन खातेदारों को 20% आवासीय और पांच प्रतिशत व्यावसायिक भूमि देने का आरक्षण पत्र दे चुका है
-27 नवंबर 2017 को जेडीए ने करीब 90 खातेदारों को भूखंड आवंटित किए थे
-किसानों की मांग है कि हम अपनी जमीन दे चुके हैं
-हमारे पास रहने के लिए कोई जमीन नहीं बची है
-ऐसे में मकान बनाने के लिए जेडीए ने लॉटरी के माध्यम से भूखंडों का आवंटन किया था
-लेकिन पूरा 25% विकसित भूखंड का मुआवजा नहीं दिया गया था
-करीब डेढ़ सौ खातेदार ऐसे हैं जिन्होंने वर्ष 2020 तक जेडीए को अपनी जमीन समर्पित कर दी थी
-लेकिन जेडीए ने इन्हें 4 साल बीतने के बावजूद आरक्षण पत्र जारी नहीं किया है
-इस तरह करीब 600 खातेदार या किसान योजना के लिए अपनी जमीन दे चुके हैं
-लेकिन जेडीए ने इन्हें विकसित भूखंड का पूरा मुआवजा अब तक नहीं दिया है
-जेडीए 1 जनवरी 2020 को यहां काम शुरू किया था
-लेकिन किसानों के एक  धड़े ने अधिक मुआवजे की मांग को लेकर आंदोलन शुरू कर दिया

अतिरिक्त मुख्य सचिव नगरीय विकास विभाग आलोक गुप्ता ने हाल ही जेडीए की पहली समीक्षा बैठक ली थी. बैठक में जेडीए की ओर से नींदड़ आवासीय योजना का मामले पर भी चर्चा हुई थी. जेडीए आयुक्त सिद्धार्थ महाजन ने विभाग से जल्द मार्गदर्शन भेजने की मांग की. जानकारों के अनुसार योजना की 327 हैक्टेयर भूमि से करीब 282 हैक्टेयर भूमि पर ही वर्तमान में योजना क्रियान्वित की जा सकती है. इसमें से खातेदारों को मुआवजा देने और सड़क व पार्क आदि सुविधाओं में भूमि जाने के बाद जेडीए के पास करीब 100 हैक्टेयर भूमि बचेगी. इस भूमि के निस्तारण से जेडीए अधिकारियों को उम्मीद है कि करीब 6 हजार करोड़ रुपए का राजस्व मिल सकता है. लेकिन योजना को मूर्त रूप देने के लिए जेडीए को नगरीय विकास विभाग के मार्गदर्शन का इंतजार है. आपको बताते हैं कि जेडीए ने किन बिंदुओं पर क्या मार्गदर्शन मांगा है और इन पर जेडीए का क्या पक्ष है-

नींदड़ बचाओ किसान संघर्ष समिति ने JDCको दिया था ज्ञापन
ज्ञापन के 15बिंदुओं पर जेडीए ने अपना पक्ष रखते हुए मांगा था मार्गदर्शन
समिति की मांग थी कि किसानों की मौजूदगी में योजना का सर्वे और
किसानों को मुआवजा दिया जाए प्रचलित दर से
जेडीए का पक्ष है कि 25% विकसित भूमि का दिया जाएगा मुआवजा
मकान व अन्य नकद मुआवजा दिया जाएगा तत्कालीन प्रचलित दर पर
मौजूदा दर पर मुआवजे के लिए सरकार की स्वीकृति है जरूरी
समिति की मांग है कि विकसित भूमि देने का दिया जाए विकल्प
न्यायालय में जमा मुआवजा राशि जेडीए में कराई जाए जमा
इस मांग पर जेडीए क पक्ष है कि
विवाद की स्थिति में मुआवजे का निर्धारण न्यायालय करेगा
न्यायालय में जमा राशि वापस जेडीए में जमा करने और
विकल्प देने के लिए सरकार की स्वीकृति है आवश्यक

समिति की मांग है कि मुआवजे में 25% आवासीय भूमि और
10% व्यावसायिक भूमि 200 फीट रोड पर दी जाए
जेडीए का पक्ष है कि भूमि अवाप्ति अधिनियम में नहीं है कोई प्रावधान
35 प्रतिशत विकसित भूमि दिए जाने का नहीं हैं कोई प्रावधान
पूर्व में पारित अवार्ड के अनुसार दी जा सकती है कुल 25%भूमि
जिस मूल खातेदार की जमीन आ रही है 200 फीट रोड
उनको ही 200 फीट रोड पर दिया जाएगा व्यावसायिक भूखंड
शेष खातेदारों को निकटतम चौड़ी सड़क पर दिए जाएंगे ये भूखंड

समिति की मांग है कि किसानों को पेड़-पौधों,नलकूपों,
भूमिगत सीमेंटेड पाइप,पानी की होद और
निर्मित मकानों का वर्तमान दर से दिया जाए मुआवजा
इस मांग पर जेडीए का कहना है कि
तत्कालीन दर के अनुसार ही दिया जाएगा ये मुआवजा
वर्तमान दर के लिए राज्य सरकार से स्वीकृति है जरूरी

समिति की मांग, जिन किसानों की आबादी भूमि है अवाप्ति
उन किसानों को बतौर मुआवजा दिया जाए आधी भूमि
जेडीए को इस मांग पर राज्य सरकार से मार्गदर्शन है अपेक्षित

समिति की मांग है कि नहीं लिया जाए किसी प्रकार का कोई शुल्क
मुआवजे में आवंटित भूखंड के लिए नहीं ली जाए कोई शुल्क
जेडीए का इस मांग पर कहना है कि
बीएसयूपी शुल्क,भवन निर्माण अनुमति शुल्क व
अन्य अमानत राशि आदि लेने का नियमों में है प्रावधान
इन शुल्कों में छूट के लिए राज्य सरकार की स्वीकृति है आवश्यक

समिति की मांग है कि जहां तक संभव हो नहीं तोड़े जाएं
किसानों के मकानात,जहां तक संभव हो नहीं तोड़े जाएं
इस मांग पर जेडीए का कहना है कम से कम तोड़े जाएंगे मकान
इसके लिए योजना मानचित्र को किया जाएगा संशोधित

किसानों की मांग है कि मौके पर ही कैंप लगाकर दिए जाएं
किसानों को मुआवजे के भूखंडों के आवंटन पत्र व पट्टे दिए जाएंगे
जेडीए का इस मांग को लेकर कहना है कि
कैम्प लगाकर ही यह कार्यवाही की जाएगी
कैंप के स्थान पर जेडीए स्तर पर किया जाएगा विचार     

समिति की मांग है कि कॉलोनियों का किया जाए नियमन
योजना की भूमि पर बसी कॉलोनियों का किया जाए नियमन
जेडीए का इस मांग पर कहना है कि
मामले में राज्य सरकार मार्गदर्शन है आवश्यक