जयपुर : आबकारी विभाग ने साल के अंतिम माह में राहत की सांस ली है. आयुक्त की लगातार मॉनिटरिंग और लाइसेंसियों पर सख्ती का नतीजा रहा कि दिसंबर में प्रदेश में शराब उठाव (लिफ्टिंग) 103 प्रतिशत रही. जिन शहरों में पर्यटकों की संख्या ज्यादा रही, वहां आंकड़ा सबसे ज्यादा रहा. दिसंबर में किसने बाजी मारी और किसे फटकार पड़ी.
आबकारी विभाग में मई से नवंबर तक राजस्व वसूली के आंकड़ों ने जिम्मेदारों की नींद उड़ा दी थी, राजस्व वसूली को लेकर कई बार अधिकारियों की फटकार पड़ी और सस्पेंशन तक किया गया. लेकिन दिसंबर ने बड़ी राहत दी है. दिसंबर में शराब उठाव के आंकडों में 25 जिलों ने 100 प्रतिशत से अधिक राजस्व अर्जित कर शाबाशी ली. इसमें भी उन जिलों ने बाजी मारी, जहां पर्यटन बूम पर था. जैसलमेर में दिसंबर के दौरान लिफ्टिंग 121 प्रतिशत रही, जो संभवतः पहले कभी नहीं रही. उधर, जयपुर शहर में भी बूम के चलते शराब उठाव बेहतर रहा.
जबकि कमजोर जिलों को अंतिम चेतावनी भी मिली है. आबकारी आयुक्त शिवप्रसाद नकाते ने साफ कर दिया कि कमजोर जिलों के पांच जिला आबकारी अधिकारी और 10 सीई को तीन दिन में चार्जशीट सौंपी जाएगी. देखने वाली बात यह रहेगी कि जनवरी का जो टारगेट मिला है, उसमें कितने जिले आगे निकल पाते हैं.
दिसंबर के दौरान जिलेवार लिफ्टिंग के आंकड़े (गारंटी व लिफ्टिंग करोड़ रुपए में)
जिला---------गारंटी----------लिफ्टिंग---------गारंटी वसूली
डूंगरपुर------17.48----------13.69----------78 प्रतिशत
बांसवाड़ा-----15.78----------13.62---------88 प्रतिशत
प्रतापगढ़-----7.15------------6.17-----------89 प्रतिशत
झालावाड़----17.38----------13.69----------94 प्रतिशत
चित्तौड़गढ़---20.08----------19.09----------97 प्रतिशत
बाड़मेर------27.70----------27.05----------98 प्रतिशत
सवाई माधोपुर--14.47------13.10----------99 प्रतिशत
हनुमानगढ़----24.90-------21.29-----------100 प्रतिशत
सिरोही--------28.80--------28.83-----------100 प्रतिशत
जालोर--------32.66--------32.80------------100 प्रतिशत
भीलवाड़ा-----26.67--------26.98------------101 प्रतिशत
दौसा----------14.37--------14.56------------101 प्रतिशत
चूरू-----------23.41--------23.87------------102 प्रतिशत
टोंक-----------13.67--------13.95------------102 प्रतिशत
कोटा----------31.33--------32.04------------102 प्रतिशत
करौली--------7.90----------8.08--------------102 प्रतिशत
उदयपुर-------49.11--------50.27------------102 प्रतिशत
बारां-----------16.77--------17.21------------103 प्रतिशत
बीकानेर-------31.97--------32.90------------103 प्रतिशत
बूंदी------------12.73--------13.12------------103 प्रतिशत
पाली-----------24.41--------25.19------------103 प्रतिशत
श्रीगंगानगर---30.32---------31.33------------103 प्रतिशत
नागौर---------29.59---------30.63------------104 प्रतिशत
सीकर---------39.54---------41.12------------104 प्रतिशत
झुंझुनूं---------24.22----------25.39-----------105 प्रतिशत
जोधपुर-------57.40----------60.64-----------106 प्रतिशत
जयपुर ग्रामीण-40.37--------42.67------------106 प्रतिशत
बहरोड़--------31.40----------33.32-----------106 प्रतिशत
अलवर--------25.93----------27.72------------107 प्रतिशत
भरतपुर-------25.90----------27.95------------108 प्रतिशत
धौलपुर--------11.01----------11.99------------109 प्रतिशत
अजमेर--------56.75----------61.80-----------109 प्रतिशत
जयपुर सिटी--101.27---------110.74---------109 प्रतिशत
राजसमंद-----16.79-----------18.37-----------109 प्रतिशत
जैसलमेर------12.58-----------15.20-----------121 प्रतिशत
दिसंबर के आंकड़े की बात करें तो प्रदेशभर की गारंटी 961.78 करोड़ रही. जबकि टोटल लिफ्टिंग (शराब उठाव) 994.96 करोड़ रुपए का होना था. इसके मुकाबले प्रदेशभर में 994.77 करोड़ की शराब उठी. ऐसे में राजस्व वसूली का आंकड़ा 103 प्रतिशत रहा है. देखने वाली बात यह है कि डूंगरपुर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़, बाड़मेर, सवाई माधोपुर, बूंदी सहित करीब 10 जिलों को चेतावनी मिली है कि जनवरी में आंकड़े बेहतर दिखाई देने चाहिए. नहीं तो बड़ी कार्रवाई होगी. अब जिम्मेदार फील्ड में भी दिखाई दे रहे हैं और चिंतित भी हैं कि आंकड़ा पूरा नहीं हुआ तो ना जाने कहां जाना होगा.