जयपुर : जयपुर की हवा में फिर एलर्जी का खतरा आ गया है. जयपुर की हवा में इस साल पहली बार 20 फरवरी को 'पोल्लन' मिला है. अस्थमा भवन में लगे सिस्टम पर "होलोप्टेलिया इंटीग्रिफोलिया पोल्लन" डिटेक्ट किया है. अस्थमा भवन की निदेशक डॉ.निष्ठा सिंह ने की पोल्लन डिटेक्ट होने की पुष्टि की है.
उन्होंने बताया कि होलोप्टेलिया इंटीग्रिफोलिया एक तरह का औषधीय पेड़ है. इसे चिलबिल-बंदर की रोटी का पेड़ भी कहा जाता है, जिसमें एलर्जिक पराग पैदा होते है. ये परागकण हवा में फैलकर लोगों को अलग अलग तरह की दिक्कत दे रहे हैं. इसमें आंखों में जलन, त्वचा पर चकत्ते, नाक बंद होना, खांसी, जुकाम, छीकें आना या सांस लेने में कठिनाई और घरघराहट की शिकायत जैसी दिक्कत आम बात है.
उन्होंने बताया कि चिलबिल का असर सुबह के समय और शाम के समय अधिक होता है. जिससे एलर्जी से प्रभावित व्यक्तियों के लिए बचाव के उपाय करना जरूरी हो जाता है. इसमें सबसे जरूरी है अस्थमा और एलर्जी के मरीज मास्क का हमेशा उपयोग करें. साथ ही प्रशासन को भी चाहिए कि बड़े पार्क व सार्वजनिक जगहों पर ऐसे पेड़ चिन्हित करें. इन पेड़ों की सतत निगरानी हो और जरूरत पड़ने पर उनकी छंगाई की जाए.