VIDEO: अलवर में बनेगा राजस्थान का सबसे बड़ा बायोलॉजिकल पार्क, सरिस्का की दहलीज पर 100 हेक्टेयर में विकसित होगा आधुनिक इको-टूरिज्म व संरक्षण केंद्र

अलवर (अश्विनी यादव) : अरावली पर्वतमालाओं की तलहटी और सरिस्का टाइगर रिजर्व के प्राकृतिक परिदृश्य से सटे अलवर में राजस्थान का एक अत्याधुनिक बायोलॉजिकल पार्क मूर्त रूप लेने जा रहा है. इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए 344 पेज की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर ली गई है, जिसे केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (CZA) से भी स्वीकृति मिल चुकी है. यह पार्क शहर के नजदीक कटी घाटी क्षेत्र में नगर वन और जयसमंद बांध के समीप लगभग 100 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित होगा. केन्द्रीय मंत्री भूपेन्द्र यादव के विजन से शुरू हुआ काम अब गति पकड़ रहा है. वन मंत्री संजय शर्मा और पूरा विभाग बेहतर बनाने के लिए काम कर रहा है.

विभाग का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल एक चिड़ियाघर बनाना नहीं, बल्कि संरक्षण, शिक्षा, अनुसंधान और उत्तरदायी मनोरंजन- चार स्तंभों पर आधारित एक आधुनिक, कल्याण-केंद्रित एक्स-सीटू संरक्षण संस्थान की स्थापना करना है. डीपीआर के अनुसार पार्क में प्राकृतिक पहाड़ी तलहटी, झाड़ीदार वनस्पति, पथरीली चट्टानें, मौसमी जलधाराएं और ओएसिस जैसे आवास-आधारित एनक्लोजर विकसित किए जाएंगे, ताकि वन्यजीवों को प्रजाति-उपयुक्त और समृद्ध वातावरण मिल सके तथा आगंतुकों को वास्तविक प्रकृति के निकट अनुभव प्राप्त हो. प्रस्तावित अलवर बायोलॉजिकल पार्क में बड़े और खुले एनिमल एनक्लोजर, सफारी ज़ोन, एजुकेशन एवं इंटरप्रिटेशन सेंटर, आउटरीच एक्टिविटी, इकोलॉजिकल ग्रीन गेटवे, ओपन थिएटर, एवियरी, सरीसृप गृह तथा एनिमल रेस्क्यू एवं क्वारंटाइन सेंटर विकसित किए जाएंगे. 

पार्क को इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि यह सरिस्का–अरावली परिदृश्य के साथ पारिस्थितिक रूप से जुड़ा रहे और संरक्षण मूल्यों से समझौता न हो. डीपीआर में लगभग 2.1 हेक्टेयर क्षेत्र में एक अत्याधुनिक पशु चिकित्सा अस्पताल का प्रावधान किया गया है, जिसमें ऑपरेशन थिएटर, रेडियोलॉजी यूनिट, डायग्नोस्टिक लैब, फार्मेसी, आइसोलेशन वार्ड और पोस्ट-ऑपरेटिव केयर सुविधाएं शामिल होंगी. यह अस्पताल न केवल पार्क में रखे गए पशुओं, बल्कि सरिस्का–अलवर परिदृश्य से बचाए गए घायल वन्यजीवों के उपचार का भी प्रमुख केंद्र बनेगा. 

शव निस्तारण के लिए सेन्ट्रल जू ऑथोरिटी मानकों के अनुरूप इंसीनेरेटर की व्यवस्था भी की जाएगी. अलवर बायोलॉजिकल पार्क को संसाधन-कुशल और जलवायु-संवेदनशील मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा. इसमें वर्षा जल संचयन, अपशिष्ट व अपशिष्ट जल प्रबंधन, नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग, देशी प्रजातियों के माध्यम से परिदृश्य पुनर्स्थापन तथा न्यूनतम रख-रखाव वाली ज़ेरोफाइटिक वनस्पति को प्राथमिकता दी जाएगी. सीजेडए के निर्देशानुसार पार्क क्षेत्र में कम से कम 30 प्रतिशत हरित आवरण सुनिश्चित किया जाएगा.

इस परियोजना से प्रत्यक्ष रूप से लगभग 160 कर्मचारियों को रोजगार मिलेगा. साथ ही, स्थानीय समुदायों-विशेषकर महिलाओं और युवाओं-के लिए गाइड सेवाओं, हस्तशिल्प, प्रकृति-आधारित उद्यमों और इको-टूरिज्म गतिविधियों के माध्यम से आजीविका के नए अवसर सृजित होंगे. यह पार्क अलवर और आसपास के पर्यटन स्थलों के लिए एक बड़ा आकर्षण बनेगा और पर्यटकों के ठहराव की अवधि बढ़ाने में सहायक होगा. अलवर बायोलॉजिकल पार्क, नाहरगढ़ (जयपुर), सज्जनगढ़ (उदयपुर), माचिया (जोधपुर) और अभेड़ा (कोटा) जैसे मान्यता प्राप्त बायोलॉजिकल पार्कों के नेटवर्क को और सुदृढ़ करेगा. यह पार्क राज्य में चल रहे इन-सीटू संरक्षण प्रयासों का पूरक बनते हुए, अनुसंधान, संरक्षण प्रजनन और जन-जागरूकता के क्षेत्र में एक रेफरेंस इंस्टीट्यूशन के रूप में उभरेगा. वन विभाग के अनुसार, सरकार और मान्यता प्राप्त वित्तीय संस्थानों के सहयोग से परियोजना का चरणबद्ध और समयबद्ध क्रियान्वयन किया जाएगा. समन्वित प्रयासों और पेशेवर प्रबंधन के साथ, अलवर बायोलॉजिकल पार्क न केवल राजस्थान बल्कि उत्तर एवं पश्चिम भारत में वन्यजीव संरक्षण, शिक्षा और सतत पर्यटन का एक नया मानक स्थापित करेगा.

केन्द्रीय वन मंत्री भूपेन्द्र यादव का सपना है कि इस बायोलोजिकल पार्क में टाइगर की दुनिया में मिलने वाली सभी सात प्रजातियां हों, दरियाई घोड़े और एक बटर फ्लाई पार्क भी हो जिसके लिए जमीन रिजर्व की गई है और विभिन्न प्रजातियों की तितलियां देखने को मिलेंगी. यह एक ऐसा सेन्टर होगा जहां ना केवल वन्यजीवों का संरक्षण होगा बल्कि रेस्क्यू सेंटर, अस्पताल और प्रजनन केन्द्र भी होगा, स्कूली बच्चों के लिए सीखने का केन्द्र होगा, यहां ओपन थियेटर जैसी सुविधाए होंगी. अलवर के सरिस्का में लगातार बढ़ती बाघों की संख्या के बीच ये पार्क पर्यटकों की संख्या में इजाफा करेगा. बायोलॉजिकल पार्क में जानवरों की 81 प्रजातियां आयेंगी और कुल 417 तरह के जानवर होंगे. एनसीआर क्षेत्र में इस तरह का एक अकेला पार्क भी होगा.