VIDEO: बीकानेर मना रहा अपना 539वा स्थापना दिवस, गंगा-जमुनी तहज़ीब के रंग में रंगा बीकानेर आज डूबा जश्न में, देखिए ये खास रिपोर्ट

बीकानेर: बीकानेर आज मना रहा है अपना 539वां स्थापना दिवस. राव बीका की बसाई इस नगरी ने सदियों का सफर तय किया, वक्त बदला दौर बदले लेकिन नहीं बदली तो यहां की बीकानेरियत. पतंगबाज़ी, खीचड़े की खुशबू और गंगा-जमुनी तहज़ीब के रंग में रंगा बीकानेर आज जश्न में डूबा है.

रसगुल्लों की मिठास, भुजिया का तीखापन और संस्कृति की अनूठी पहचान बीकानेर सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि एक अहसास है. चाहे विश्व प्रसिद्ध करणी माता मंदिर हो या जूनागढ़ का ऐतिहासिक किला यहां की हवेलियां और धरोहरें हर किसी को अपनी ओर खींच लेती हैं. स्थापना दिवस पर शहर का हर कोना उत्सव में डूबा नजर आता है. घर-घर में बनता है खीचड़ा आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से भर जाता है और राव बीका की इस नगरी में परंपराओं का उत्सव अपने चरम पर होता है. राव बीकाजी संस्थान द्वारा आयोजित समारोह में विधायक जेठानंद व्यास, संभागीय आयुक्त विश्राम मीणा ,IG ओमप्रकाश, जिला कलक्टर निशान्त जैन SP मृदुल कच्छावा  राव बीकाजी संस्थान के अध्यक्ष डॉ गिरिजा शंकर शर्मा , राजेंद्र जोशी  भाजपा नेता सत्यप्रकाश आचार्य सहित कई गणमान्य लोग रहे मौजूद . इस दौरान उत्कृष्ट कार्यों के लिए सम्मान भी हुआ . केंद्रीय क़ानून मंत्री अर्जुन मेघवाल  ने शुभकामनाएँ देते हुए कहा बीकानेर वीरता, भक्ति और शक्ति का संगम है हमारा बीकानेरहमारे गौरवशाली बीकानेर के 539वें स्थापना दिवस पर सभी बीकानेरवासियों को हार्दिक बधाई. हम सब मिलकर इस ऐतिहासिक विरासत को सहेजें और बीकानेर को विकास की नई ऊंचाइयों तक ले जाएं.

शायद बीकानेर ही ऐसा शहर है जहां स्थापना दिवस सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि एक त्योहार है.पतंगबाज़ी का जोश खीचड़े का स्वाद और इमली पानी की ताज़गी महिलाएं भी पूरे उत्साह से इस जश्न में भागीदारी निभाती हैं. चंदा बनते हैं. पूजा होती है. और हर गली-मोहल्ला उत्सव में रंग जाता है. आम और ख़ास सब उत्सव में शरीक होते है . विधायक जेठानंद व्यास भी पतंगबाज़ी का लुत्फ़ उठाते नजर आए. साथ ही विधायक जेठानंद व्यासने स्थापना दिवस पर शुभकामनाएँ दी लेकिन सियासी पेच पर भी बोलने से नहीं चुके.

538 साल के इस सफर में बीकानेर ने कई उतार-चढ़ाव देखे आपदाएं भी आईं चुनौतियां भी आईं लेकिन हर बार ये शहर और मजबूत होकर उभरा अपनायत और भाईचारे की पहचान के साथ हालांकि गौरवशाली इतिहास के बावजूद विकास के कुछ पैमानों पर अब भी सफर जारी है. लेकिन बीकानेर की पहचान उसकी आत्म आज भी वैसी ही है.